चलती का नाम गाड़ी और बढ़ती का नाम ज़िन्दगी

बढ़ती का नाम ज़िन्दगी… दम भर……जो थमें तो जाना…….दरअसल वो जीने के लिए ही मिली थी……जिस “ज़िन्दगी” को लेकर न जानें कितनी सदियों से सिरफ़ सोच ही रहे हैं हम !!!ज्यूँ सागर किनारे मोती पाने…

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थप्पड़ परम्परा

“थप्पड़ परम्परा!”दिल के नक़्शे को बदल कर रख दिया है, गालों पर पड़े थप्पड़ ने!हाँ! अभी “थप्पड़” देख रही हूं मैं!यूँ तो अकेली ही हूँ….!पर यूँ लग रहा है कि जैसे कई कई …शायद हज़ारों…

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तुम्हें खोने की हिम्मत नहीं है मुझमें, फ़िर भला तुम्हें पाने की ज़ुर्रत क्यों करूँ!

तुम्हें खोने की हिम्मत नहीं है मुझमें, फ़िर भला तुम्हें पाने की ज़ुर्रत क्यों करूँ! जानते हो? हर दफ़ा तुम्हें पा लेने के मेरे ख़्वाब, बस तुम्हें खो देने के डर से ही टूटे हैं!तो…

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कुछ शेर फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैं

यूं तो बहुत सी बातें होती हैं! घरों में, बाहर, लोगों से, गैरों से, गैरों से, अपनों से, परायों से, मगर कुछ बातें होती हैं या कुछ भी बातें होती हैं उस फितरत की, कि…

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अपनी ख़ुशी से अपना ही दिल तोड़ना पड़ा…!!

अपनी ख़ुशी से अपना ही दिल तोड़ना पड़ा…!! आंखें बंद थी!पलकों पर झूल रहे थे ख़्वाब…होंठों पर मिलने की आस….मुस्कान बन कर महक रही थी!एक दूजे को याद कर फूले नहीं समां रहे थे हम….एक…

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सोचने वाली बात 08 | मास्टर शेफ़ वही बनते हैं, जिन्हें हरी मिर्च और प्याज़ काटने से परहेज़ नहीं होता!

सोचने समझने वाली बात 08 प्यारे दोस्तों, सादर नमस्कारस्वागत है आप सभी का आपके अपने यू ट्यूब चैनल ‘लाइफेरिया’ के इस मंच पर जहां आज हम बढ़ रहे हैं एक और बेहद जरूरी और सोचने…

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सोचने वाली बात 07 क्या करें ? जब ग़लत समझ बैठे लोग हमें !! या नहीं समझे वैसे,जैसे हम हैं !!

सोचने वाली बात 07क्या करें ? जब ग़लत समझ बैठे लोग हमें !! या नहीं समझे वैसे,जैसे हम हैं !! बहुत गफ़लत होती है!, बेहद परेशानी! बड़ी बैचेनी! एक तरह से उलझन में डाल देनेवाली…

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पूरी होनी चाहिए ज़रूरतें, ख़्वाहिशों को इंतज़ार करने दीजिए…..

आख़िर वो सुबह आ ही गई!जिसका हम सभी को था इंतज़ार !इतने दिनों,महीनों के बाद खुला है लॉक डाउन ! खिले हैं लोग !और निकल पड़ी हूँ मैं बाज़ार की ओर…जैसे कोई आज़ाद पंछी भरता…

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चलो भाग चलें भीतर की ओर….. A Meditation Poem by Dr. A. Bhagwat

चलो भाग चलें भीतर की ओर….. ये वक़्त जब बाहर निकलना मुमकिन नहीं !तो क्यों न भीतर ही मुड़ा जाए !उन रास्तों पर बढ़ाए जाएं कदमजो बाहर से जाते हैं भीतर की ओर….और पहुंचा जाए…

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Afternoon Poem in Hindi

दोपहरें…जब कपड़े सूख रहे होते हैं आंगन में !बड़ी – पापड़ धूप के साथ -साथ सरकते रहते हैं इधर -उधर औरपूरा की पूरा माहौल , विविधभारती के पुराने गीतों पर आधारित हो जाता है !सुबह…

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