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चलती का नाम गाड़ी और बढ़ती का नाम ज़िन्दगी

बढ़ती का नाम ज़िन्दगी… दम भर……जो थमें तो जाना…….दरअसल वो जीने के लिए ही मिली थी……जिस “ज़िन्दगी” को लेकर न जानें कितनी सदियों से सिरफ़ सोच ही रहे हैं हम !!!ज्यूँ सागर किनारे मोती पाने…

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थप्पड़ परम्परा

“थप्पड़ परम्परा!”दिल के नक़्शे को बदल कर रख दिया है, गालों पर पड़े थप्पड़ ने!हाँ! अभी “थप्पड़” देख रही हूं मैं!यूँ तो अकेली ही हूँ….!पर यूँ लग रहा है कि जैसे कई कई …शायद हज़ारों…

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सोचने वाली बात 08 | मास्टर शेफ़ वही बनते हैं, जिन्हें हरी मिर्च और प्याज़ काटने से परहेज़ नहीं होता!

सोचने समझने वाली बात 08 प्यारे दोस्तों, सादर नमस्कारस्वागत है आप सभी का आपके अपने यू ट्यूब चैनल ‘लाइफेरिया’ के इस मंच पर जहां आज हम बढ़ रहे हैं एक और बेहद जरूरी और सोचने…

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सोचने वाली बात 07 क्या करें ? जब ग़लत समझ बैठे लोग हमें !! या नहीं समझे वैसे,जैसे हम हैं !!

सोचने वाली बात 07क्या करें ? जब ग़लत समझ बैठे लोग हमें !! या नहीं समझे वैसे,जैसे हम हैं !! बहुत गफ़लत होती है!, बेहद परेशानी! बड़ी बैचेनी! एक तरह से उलझन में डाल देनेवाली…

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पूरी होनी चाहिए ज़रूरतें, ख़्वाहिशों को इंतज़ार करने दीजिए…..

आख़िर वो सुबह आ ही गई!जिसका हम सभी को था इंतज़ार !इतने दिनों,महीनों के बाद खुला है लॉक डाउन ! खिले हैं लोग !और निकल पड़ी हूँ मैं बाज़ार की ओर…जैसे कोई आज़ाद पंछी भरता…

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ज़िन्दगी यदि सवाल है तो जवाब भी ज़िन्दगी ही होना चाहिए… मौत नहीं ! ( Question & Answer of LIFE )

ज़िन्दगी यदि सवाल है तो जवाब भी ज़िन्दगी ही होना चाहिए…मौत नहीं! सोचनेवाली बात है न ! कि हमेशा तो नहीं !!!पर हाँ ! अक़्सर सवालों में ही कहीं छुपे होते हैं जवाब भी…..वैसे ही…

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गुलमोहर उदास है !…( विश्व पृथ्वी दिवस 2021 पर विशेष) भाग – 2

‘हाय-वे’ के किनारे…एक अकेला गुलमोहर ,बस रह गया है!“सड़क चौड़ीकरण” में उसका एक-एक साथी जाता रहा !बस गुलमोहर ही रह गया है अकेला !अफ़सोस है उसे अपने किनारे होने का…यूँ चीखा वो तब भी था…

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Life during Lockdown in Hindi by A. Bhagwat

लॉक डाउन और ज़िंदगी….. {Lockdown And Life}अब एक महीना गुज़र चुका है…. लॉक डाउन हुए ! और कुछ सोच रही थी मैं …..तभी…. एक नन्हीं प्यारी सी तितली न जाने कहाँ से आकर …बस बैठी…

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पृथ्वी के पक्ष में पेड़ों के हक़ में……( विश्व पृथ्वी दिवस 2021 पर विशेष)

प्यारे दोस्तों,आप सभी को पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! बात पृथ्वी की होगी तो पेड़ों तक भी पहुँचेगी । वो पेड़ जो लाख़ झड़ चुके पत्तों के बावज़ूद खड़े रहा करते हैं , फ़िर लौटने…

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सोचने वाली बात 01 : अक़्सर हम सोचा हुआ कुछ क्यों नहीं कर पाते हैं ?

नमस्कारस्वागत है आप सभी का आपके अपने “लाइफेरिया” के इस मंच पर जहां आज हम शुरुवात कर रहे हैं श्रृंखला“सोचनेवाली बात “ सोचने वाली बात -01 सोचने वाली बात है न ! कि अक़्सर हम…

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