ख़्वाहिशों को सिखाइए सब्र का हुनर… कि अभी बहुत ज़रूरतें पूरी करनी हैं |

पूरी होनी चाहिए ज़रूरतें, ख़्वाहिशों को इंतज़ार करने दीजिए….. आख़िर वो सुबह आ ही गई!जिसका हम सभी को था इंतज़ार !इतने दिनों, महीनों के बाद खुला है लॉक डाउन ! खिले हैं लोग !और निकल पड़ी हूँ मैं बाज़ार की ओर…जैसे कोई आज़ाद पंछी भरता है नित नई उन्मुक्त उड़ान !कितना कुछ चाहती हूं मैं, …

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