कविता : एकांत

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‘एकांत’ हमें ले जाता है….


‘एकांत’ हमें ले जाता है….

भीड़ से दूर…कोलाहल से दूर….ख़ुद की ओर….प्रकृति की ओर..जीवन की ओर…!
और जीवन की ओर जाकर ही लौटाई जा सकती है मृत्यु असमय ।
इससे पूर्व कि ‘अकेला’ कर दे कॅरोना हमें….क्यों न हम एक होकर जान लें ‘एकांत’ का महत्व..
तो शुक्रिया करो न ‘कॅरोना’ का…!!
कि उसकी उपस्थिति की आशंका  से ही बढ़ने लगा है महत्व जीवन का……ये कल्पना  कि खो सकते हैं हम ‘जीवन अमूल्य’…!! 
ला देती है तेज़ी ‘संजीवनी’ की तलाश में…
तो  मृत्यु से साक्षात्कार  करवाते हुए  ही सही….

जीवन की ओर दौड़ाने का बेहद शुक्रिया…’कॅरोना’

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