भला कैसे टूट जाते हैं हमारे रिश्ते?

break relation

How does a Relationship break?

नमस्कार प्यारे दोस्तों,
स्वागत है आप सभी का आपके अपने यूट्यूब चैनल लाइफेरिया के इस मंच पर जहां आज हम जवाब दे रहे हैं श्री प्रदीप सुथार जी के प्रश्न का जिसमे उन्होंने पूछा है एक सवाल कि “भला कैसे टूट जाते हैं हमारे रिश्ते?”

पर उससे पहले आप सभी का ह्रदय की अनन्ततम गहराइयों से कोटि कोटि धन्यवाद, बहुत बहुत शुक्रिया कि आप सभी के साथ,समर्थन,सुझाव ,और सहयोग के बग़ैर हमारे लिए सम्भव नहीं था यहां तक पहुंचना ! और भविष्य में भी हमें आपके सुझाव और मशवरे की दरकार रहेगी ।
और हाँ! आप भी किसी विशेष और उल्लेखनीय विषय पर कुछ सुनना चाहते हैं तो कृपया कमेंट बॉक्स में हमें लिख भेजिए हम ज़रूर कोशिश करेंगे आपके सुझाए विषयों पर अपना मत व्यक्त करने की ।
तो चलिए करते हैं शुरुआत…. प्रदीप जी ये रहा आपके सवाल का जवाब…
एक दफ़ा क्या हुआ कि वो जो पहला था न वो अचानक चुप हो गया !….तो दूसरी भी ख़ामोश रहने लगी! ये भूल कर कि हर चुप्पी के बाद आवश्यकता होती है कुछ बातों की! सरगोशियों की! और हाँ! मुलाक़ातों की भी! जैसे हर चोट के बाद गरज़ होती है मरहम की!
ख़ैर!
पता है! फ़िर क्या हुआ ?
दोनों ने ही सोच लिया कि
वो एकदूसरे की ज़िंदगी में निभा चुके हैं जितना भी था रोल उनका ! एक रिश्ता जो अब है नहीं! बस एहसास रह गया था कि वो है!

अब ज़रा ग़ौर फ़रमाइए कि भला किसी के चुप रह जाने से ही कहाँ बचे हैं रिश्तें कभी! पर हाँ! अक्सर चुप रह जानें से ख़त्म ज़रूर हुए हैं!

पर कोई कहना ऐसे ही बंद भी तो नहीं करता! यदि किसी के सुनने की उम्मीद बची हो तो कोई भी कहना नहीं छोड़ता! और गुफ़्तगू के लिए दोनों सिरों के खुले रहने की गरज़ ज़रूरी है। वरना एक की ख़ामोशी का जवाब जब दूसरे की चुप्पी बन जाती है तो रिश्तों में दरार तय हो जाती है!

जिससे बात हुए बग़ैर एक पल नहीं गुज़रता था हमारा…..दो दिन गुज़रे तो मन उदास हो जाता था! चार दिनों में बेचैनी और और बढ़ने लगती थी!
एक हफ़्ते में तो जैसे दुनिया ही उथल पुथल हो जाती थी! ग़र महीना गुज़र जाए तो समझो जान पर ही बन आती थी!
पर यहाँ एक बात बहुत ध्यान से सुनना प्यारे दोस्तों!
ये जो वक़्त नाम की चीज़ है न!
इसकी एक ख़ासियत है ! कि ये ज़िन्दगी की मानिंद कभी ठहरता ही नहीं !
बस चलता रहता है लगातार लगातार!!
तो जब महीने गुज़र जाते हैं!
तो चुपचाप बड़ी ही ख़ामोशी से एक दुर्घटना घटती है!
और हमें ख़बर हुए बग़ैर ही एक रिश्ता प्यारा-सा, धीरे धीरे मरने लगता है!
जिनके साथ रहना आदत थी कभी!
उनके साथ न रहने की! न बोलने की! और न मिल पाने की भी आदत हो जाती है!
एक नाज़ुक सा रिश्ता कमज़ोर हो जाता है!
यूं तो ये भी ठीक है कि टूट जाने चाहिए हर वो रिश्तें जो टूट सकते हैं! मगर हरहाल बचाए भी जाने चाहिए वो रिश्तें जो बच सकते हैं! क्योंकि रिश्तें कभी भी एकतरफा नहीं होते दोस्तों!
किसी को अकेला छोड़ कर हम भी बहुत बहुत अकेले हो जाते हैं!
तो यदि आपके क़रीब भी दम तोड़ रहा हो कोई क़रीबी रिश्ता! धीमी हो गई हो नब्ज़ कोई! पांव पड़ गया हो अनजाने ही किसी नाज़ुक से रिश्ते पर ! ……तो अभी! बस अभी फ़ोन उठाओ और कॉल करो! और बोल कर बता सको तो बेहतर! वरना किसी भी तरह जता दो उन्हें कि बहुत एहमियत है उनकी हमारी ज़िंदगी में! और उनके बिना हम जी नहीं पाएंगे! क्या पता! कोई बेचारा या बेचारी बस आपके ही इंतज़ार में मरे जा रहा हों! ग़र मुमकिन हो तो सरप्राइज़ विज़िट ही मार दो कि फैल जाए उदास चेहरों पर मुस्कुराहट बड़ी!
और दोबारा जी उठे, खिलखिलाकर ख़ूबसूरत सा रिश्ता कोई……….है न!
बहुत शुक्रिया

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